डेली करेन्ट अफेयर्स 28 मार्च 2018

Daily Current Affairs 28th March 2018

सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ संसद में महाभियोग की तैयारी :-

विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं।

Opposition moves impeachment process against CJI Dipak misra

मुद्दा :-

उनके तौर-तरीकों पर सवाल उठाते हुए इस साल जनवरी में ही सुप्रीम कोर्ट के 4 सीनियर जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस ने महाभियोग प्रस्ताव का ड्राफ्ट विपक्षी दलों को बांटा है। बता दें कि सीजेआई का कार्यकाल 2 अक्टूबर तक है।

महाभियोग प्रक्रिया :-

  • महाभियोग प्रस्ताव के लिए लोकसभा में 100 और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों का हस्ताक्षर जरूरी होता है।
  • सदन का सभापति या अध्यक्ष प्रस्ताव को स्वीकार या खारिज कर सकता है।
  • प्रस्ताव पारित होने के बाद पीठासीन अधिकारी की ओर से तीन जजों की समिति का गठन किया जाता है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और किसी एक कानूनविद को शामिल किया जाता है।
  • समिति आरोपों की जांच करती है और आरोप साबित होने पर संसद में प्रस्ताव ख़ास बहुमत से पारित होने के बाद राष्ट्रपति उसे हटा देते हैं।

अंतरजातीय शादी को कोई नहीं रोक सकता खाप पंचायत भी नहीं – सुप्रीम कोर्ट :-

SC tells khap panchayats not to interfere in intercaste marriages

अंतरजातीय और दूसरे धर्म में शादी करने वाले प्रेमी जोड़ों को सुरक्षा और संरक्षण देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आनर किलिंग पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि दो व्यस्कों की मर्जी से की गई शादी में खाप पंचायत या किसी और का दखल देना गैर कानूनी है।

खाप पंचायत या किसी तरह की भीड़ कानून अपने हाथ में नहीं ले सकती। कोर्ट ने आनर किलिंग की घटनाएं रोकने के लिए विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये हैं। आनर किलिंग रोकने के लिए कानून बनाने की सिफारिश करते हुए कहा है कि जब तक कानून नहीं बनता कोर्ट के दिशा निर्देश लागू रहेंगे।

Honour Killings are illegal by khap panchayats - SC

आन के नाम पर किसी की पसंद का गला नहीं घोटा जा सकता

कोर्ट ने 54 पेज के विस्तृत फैसले में कहा है कि व्यक्ति की पसंद उसकी आजादी और आत्म सम्मान का अहम हिस्सा है। जब किसी की पसंद को आन के नाम कुचला जाता है और व्यक्ति को शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है तो समाज सिहर उठता है। परिवार के बड़े या घराना किन्ही धारणाओं और आवेश में आकर उनकी पसंद के खिलाफ शादी करने वाले युवाओँ का जीवन नहीं छीन सकते। ऐसा करना असंवैधानिक है।

सामाजिक उत्थान के बावजूद आनर किलिंग की समस्या कायम

कोर्ट ने कहा कि लगातार सामाजिक उत्थान होने के बावजूद आनर किलिंग की समस्या उसी तरह बनी हुई है जैसे कि इतिहास में 1750 बीसी में हम्मूराबी कोड में इसका जिक्र है। इस अपराध में शामिल लोग इस बात से बेपरवाह रहते हैं कि वे अपने नैतिक और दार्शनिक तर्को के आधार पर कानून तोड़ने और गैरकानूनी रास्ता अपनाने को सही नहीं ठहरा सकते।

बेटी, भाई, बहन का मानवाधिकार आन बंधक नहीं

कोर्ट ने कहा कि बेटी, भाई, बहन या बेटे का मानवाधिकार परिवार और घराने की कथित आन का बंधक नहीं है। आनर किलिंग के कृत्य ने कानून के शासन को गंभीर संकट में डाल दिया है।

  • आन के नाम पर किसी व्यक्ति पर अत्याचार गैरकानूनी है और ये एक क्षण भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
  • अगर दो वयस्क अपनी पसंद से शादी करते हैं तो उसमें किसी समुदाय, परिवार या घराने की सहमति की आवश्यकता नहीं है। उन दोनों की पसंद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • कोई अनौपचारिक संस्था न्याय नहीं कर सकती।

कानून समाज में अनुशासन बनाए रखने के लिए होता है। कोर्ट ने कहा कि खाप पंचायत या इस तरह का कोई और संगठन कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता। वे कानून लागू करने वाली एजेंसी के चरित्र में नहीं आ सकती। वे सिर्फ एफआईआर दर्ज कर पुलिस को सूचित कर सकती हैं।

पसंद का जीवनसाथी चुनना मौलिक अधिकार का हिस्सा

  • दो वयस्कों की पसंद से एक दूसरे को जीवनसाथी चुनना संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की आजादी) और 21 (जीवन का अधिकार) के तहत आता है। इस अधिकार को क्लास आनर के आधार पर नहीं खतम किया जा सकता। इस अधिकार में दखल देना संविधान के खिलाफ है।

Leave a Reply